निरोगी काया के लिये करिये गायत्री मंत्र का जाप


आप गायत्री मंत्र के जाप से शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य-लाभ बहुत आसानी से प्राप्त कर सकते है  यह मंत्रों का मंत्र सभी हिन्दू शास्त्रों में प्रथम और महामंत्र कहा गया है। गायत्री मंत्र का जाप न सिर्फ आपके मन को शांति और पवित्रता प्रदान करता है बल्कि कई प्रकार के बीमारियों को दूर करके स्वस्थ रहने में मदद करता है।

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गायत्री मंत्र – “ॐ भूर्भुव स्वः। तत् सवितुर्वरेण्यं। भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात्”

गायत्री मंत्र के जाप से आपके स्वास्थ्य को कई प्रकार से लाभ मिलते है – आइये इनको जाने और लाभ प्राप्त करे

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  • इस मंत्र का उच्चारण मन शांत होता है। ये मंत्र ऊँ से शुरू होता है। जिसके उच्चारण से होंठ, जीभ, तालू, गला और खोपड़ी के पिछले भाग में आवाज प्रतिध्वनित होती है जिससे इस मंत्र के शब्दांशों के उच्चालरण से मन एकाग्र हो जाता है जिससे काम करने की क्षमता बढ़ती है।
  • शरीर में ऊर्जा का संचार करने में सहायता करता है  उच्चारण से जीभ, होंठ, स्वरनली, तालु और मस्तिष्क के संबंधित क्षेत्रों पर दबाव पड़ता है जिसके कारण हाईपोतैलामस (hypothalamus) नाम का ग्रंथि सक्रिय हो जाता है जो प्रतिरक्षा क्षमता को उन्नत करने में मदद करता है।विशेषज्ञों का ऐसा मानना है कि यह ग्रंथि मन को प्रसन्न करने वाले हार्मोन को निष्कासित करने में मदद करती है, जिससे मन और शरीर का संबंध जुड़ता है। इसके उच्चारण से शरीर का मूल चक्र सक्रिय हो जाता है।
  • गायत्री मंत्र के गुंजन से याद रखने की शक्ति और एकाग्रता बढ़ती है द इंटरनैशनल जर्नल ऑफ योग के अनुसार ये सत्यापित हुआ है गायत्री मंत्र से तीन चक्र प्रतिध्वनित होते हैं जिससे मस्तिष्क की एकाग्रता, आँख, साइनस, माथा और पिटूइटरी ग्लैंड और थाइरॉयड ग्लैंड प्रभावित होते हैं।
  • गायत्री मंत्र जाप मे गहरी साँस लेने से शरीर को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सिजन मिल पाता है जिससे शरीर स्वस्थ रहता है मंत्र का उच्चारण करते समय गहरी साँस लेनी चाहिए जिससे फेफड़ों का कार्यकलाप उन्नत होता है।
  • गायत्री मंत्र के उच्चारण से दिल के धड़कन की गति नियंत्रित होती है और दिल को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। ब्रिटिश मेडकल जर्नल के अनुसार ये बताया गया है।
  • इस मंत्र का उच्चारण तंत्रिकाओं के कार्य करने की क्षमता बढ़ता है गायत्री मंत्र के उच्चारण से जीभ, होंठ, स्वर तंत्री और संबंधित क्षेत्र प्रभावित होते है।
  • गायत्री मंत्र का उच्चारण तनाव से जो शरीर को क्षति पहुँचती है उस क्षति को पूर्ण करने में मदद करता है। जिससे मन शांत और तनाव दूर होता  है।
  • इस मंत्र के उच्चारण से मन नियंत्रित, शांत और एकाग्र रहता है। इस मंत्र के उच्चारण से शरीर से एन्ड्रोफीन और आराम देना वाला हार्मोन निकलने लगता है।
  • गायत्री मंत्र का जाप रक्त का संचार बढ़ता है और शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं। जाप के दौरान गहरी साँस लेने से शरीर में ऑक्सिजन का संचार ज़्यादा होता है जिससे त्वचा ज़्यादा जवान और निखरी नजर आने लगती है।
  • इस मंत्र का जाप करते समय गहरी साँस लेनी होती है और कुछ देर के लिए साँस को रोक कर रखना पड़ता है जिससे फेफड़ों को शक्ति मिलती है और दमे के लक्षणों को कम करने में मदद मिलती है।
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