जानिये स्तंभेश्वर महादेव के अदभुत मंदिर के बारे मे जो अदृश्य हो जाता है


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पौराणिक कथा – पौराणिक कथा के अनुसार ताड़कासुर ने कठोर तपस्या से भगवान शिव को प्रसन्न कर लिया था और वरदान मांगा कि उसे कोई न मार सके। भगावन शिव ने कहा कि ये असंभव है तब असुर ने ये वर मांगा की उसे सिर्फ शिव पुत्र ही उसका वध कर सके और वह भी छह दिन की आयु का। वरदान प्राप्त करके ताड़कासुर ने तीनों लोकों में हाहाकार मचाना शुरू कर दिया। सभी देवता मिलकर वापस भगवान शिव के पास पहुचे और अपनी समस्या को बताया। शिव-शक्ति से श्वेत पर्वत के कुंड में उत्पन्न हुए शिव पुत्र कार्तिकेय के 6 मस्तिष्क, चार आंख, बारह हाथ थे। कार्तिकेय ने ही मात्र 6 दिन की आयु में ताड़कासुर का वध किया। जब कार्तिकेय को ज्ञात हुआ कि ताड़कासुर भगवान शिव का भक्त था। तब वे व्यथित हुये ।भगवान विष्णु के उन्हे  कहा कि  वो वधस्थल पर शिवालय का निर्माण कराये इससे उनका मन शांत होगा। महिसागर संगम तीर्थ पर ‘विश्वनंदक’ स्तंभ की स्थापना की । सभी देवगणों वहाँ उपस्थि रहे। पश्चिम भाग में स्थापित स्तंभ में भगवान शंकर स्वयं आकर विराजमान हुए इस तीर्थ को स्तंभेश्वर नाम से जाना जाता हैं।

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